आरटीआई से खुलासा : 15 वर्षों से बारीदारों को क
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आरटीआई से खुलासा : 15 वर्षों से बारीदारों को क
आरटीआई से खुलासा : 15 वर्षों से बारीदारों को करोड़ों का अतिरिक्त भुगतान
Reported by thepunjabkesri.com on August 12,2012
http://www.thepunjabkesari.com/himac...esh/news/59974
शिमला : हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा स्थित सुप्रसिद्ध श्रीज्वाला जी मंदिर में प्रशासनिक कोताही के चलते 15 वर्षों तक बारीदार पुजारियों के वारे-न्यारे होते रहे। रजनीश खोसला द्वारा आरटीआई से मांगी गई सूचना के तहत जारी की गई ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मंदिर न्यास की ओर से गत 15 वर्षों में पूजा-अर्चना एवं मंदिर रखरखाव व्यय की वास्तविक लागत कम किए बगैर बारीदारों को उनके हिस्से के रूप में करोड़ों का अधिक भुगतान किया जा चुका है। इतना ही नहीं बारीदारों को त्रैमासिक आधार पर भुगतान करने से मंदिर को ब्याज स्वरूप अर्जित होने वाली लाखों रुपए की आय से भी हाथ धोना पड़ा है।
आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2009 में ही पूजा-अर्चना और मंदिर रखरखाव व्यय की वास्तविक कटौती किए बगैर बारीदारों को उनके हिस्से के रूप में 38,95,448 रुपए का गलत रूप से अतिरिक्त भुगतान किया गया। इससे मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
मंदिर आयुक्त के कार्यालय पत्र संख्या 5235/पीएफआर/ दिनांक 31-8-1988 के अनुसार मुख्य मंदिर तथा शैय्या भवन की आय में से जो पूजा प्रभार और मंदिर रखरखाव के व्यय को घटाने के बाद ही शेष बची आय का आधा बारीदारों को दिया जाना उपेक्षित था लेकिन इन स्पष्ट आदेशों के बावजूद भी मंदिर न्यास ने मनमाने तरीके से मुख्य मंदिर की आय में से ठीक तरीके से इसे नहीं काटा है।
मंदिर आयुक्त के स्पष्ट निर्देशों के तहत बारीदारों को नियमानुसार जो हिस्सा दिया जाना था वह 10,48,5708.00 रुपए था लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते इसका भुगतान 14,38,1156.00 रुपए किया गया। इस तरह 38,95448.00 लाख रुपए का अधिक एवं गलत भुगतान किया गया। ऑडिट रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि उपरोक्त आयुक्त मंदिर के निर्णय की अनुपालना न करना मंदिर न्यास की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। अत: यह मामला हिमाचल सरकार और मुख्य आयुक्त मंदिर में ध्यान में लाया जा रहा है।
इतना ही नहीं वर्ष 2009 में मंदिर न्यास द्वारा कर्मचारियों को 5229 रुपए का गलत ढंग से भुगतान का मामला सामने आया है जिसकी पुष्टि मंदिर कार्यालय के पत्र संख्या 01/12/994 दिनांक 7 जुलाई द्वारा भी की गई है।
वहीं इस मामले के संबंध में जब भाषा एवं संस्कृति के निदेशक राकेश कंवर से जानकारी मांगी गई तो उनका कहना था कि ऐसा कोई मामला उनके ध्यान में नहीं है। उन्होंने कहा कि चैक करने के बाद की बताऊंगा। हालांकि इस संबंध में मुख्य मंदिर आयुक्त मनीषा नंदा से भी संपर्क किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।




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