सड़क निर्माण के नाम पर लाखों की हेराफेरी


Reported by jagran.com on August 25, 2012
सड़क निर्माण के नाम पर लाखों की हेराफेरी 9600601

जागरण प्रतिनिधि, त्यूणी: चकराता वन प्रभाग के सेरा-नाड़ा वन मोटर मार्ग के मरम्मत व सुधारीकरण कार्य के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी का मामला प्रकाश में आया है। आरटीआई के तहत मिली सूचना से पता चला है कि विभागीय अधिकारियों ने जिन मजदूरों के नाम पर मस्टररोल से लाखों रुपये का भुगतान होना दर्शाया, उनमें से ज्यादात्तर मजदूर फर्जी दर्शाए गए हैं। ग्राम पंचायत नाड़ा के उप प्रधान ने मुख्यमंत्री से मामले की शिकायत कर इस फर्जीवाड़े की जांच कराने की मांग की है।

जनजाति क्षेत्र के दुर्गम ग्रामीण इलाकों के इन लोगों को सड़क सुविधा का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चकराता वन प्रभाग ने पिछले तीन साल में सेरा-नाड़ा वन मोटर मार्ग के मरम्मत व सुधारीकरण कार्य के नाम पर सरकार से मिले लगभग 18 लाख रुपये खर्च कर डाले, लेकिन सड़क की हालत जस की तस है। ग्रामीणों को आरटीआई के तहत मिली सूचना से पता चला कि चकराता वन प्रभाग के रिखनाड़ रेंज नाड़ा के कुछ वन अधिकारियों ने इस मार्ग के मरम्मत व सुधारीकरण कार्य के नाम पर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया है। इस सड़क निर्माण कार्य के तहत मस्टररोल में जिन मजदूरों के नाम पर विभागीय अधिकारियों ने लाखों रुपये का भुगतान होना दर्शाया है, वे सभी फर्जी दिखाए गए हैं।

ग्राम पंचायत नाड़ा के उप प्रधान पूरण सिंह राणा का आरोप है कि रिखनाड़ रेंज-नाड़ा के वन दारोगा ने जनवरी-2009, अक्टूबर-2010 व नवंबर-2011 में बिना टेंडर के ही सड़क मरम्मत कार्य के नाम पर मस्टररोल से कई फर्जी मजदूरों के नाम पर दो लाख रुपये से अधिक सरकारी धन का गोलमाल किया किया है। उप प्रधान ने कहा कि आरटीआई के तहत मांगी गई इस सूचना को देने में विभागीय अधिकारी पिछले काफी समय से आनाकानी कर रहे थे। सूचना आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें यह सूचना मिली। उप प्रधान ने सीएम विजय बहुगुणा, क्षेत्रीय विधायक एवं काबिना मंत्री प्रीतम सिंह व राज्य लोक सूचना आयुक्त से मामले की शिकायत की है। उप प्रधान ने सड़क निर्माण कार्य के नाम पर हुए लाखों रुपये के इस फर्जीवाड़े की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है।

सेरा-नाड़ा वन मोटर मार्ग के मरम्मत व सुधारीकरण कार्य कराने के लिए कुछ समय पहले टेंडर लगाए गए थे। सड़क का कुछ कार्य टेंडर से और कुछ कार्य समय परिस्थितियों के मद्देनजर विभागीय अधिकारियों द्वारा अपनी देखरेख में कराया गया। जहां तक मस्टररोल से फर्जी मजदूरों को दर्शाकर लाखों के भुगतान होने की बात है, इसकी जांच की जाएगी।