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epaper link : http://epaper.patrika.com/10770/Raja...ा। तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में छिपी सच्चाई उजागर होने में अभी वक्त लगेगा। हालांकि कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय ने उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद छात्रों को कॉपियां दिखाने की प्रक्रिया पर मंथन शुरू कर दिया है।
विश्वविद्यालय अगले माह में होने वाली प्रबंध मण्डल की बैठक में इस प्रस्ताव को शामिल कर इस संबंध में कुछ निर्णय कर सकता है। साथ ही कॉपी दिखाने के नियम बनाने के लिए विश्वविद्यालय सरकार के स्तर पर भी चर्चा करेगा। उधर, विद्यार्थी कॉपियां देखने के लिए आवेदन करने लगे हैं। विश्वविद्यालय का मानना है कि कॉपियां दिखाना अलग विभाग की तरह का कार्य होगा। इसके लिए न्यायालय के आदेशों का अध्ययन करने व कानूनी राय लेने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
ये हैं परेशानियां
विश्वविद्यालय पहले से ही मानवीय संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। यहां विश्वविद्यालय के खाते में कोई कर्मचारी नहीं है, वर्तमान कर्मचारी इंजीनियरिंग कॉलेज से लिए गए हैं। शेष एजेंसी के कर्मचारियों से काम खिंच रहा है।
परीक्षा विभाग नए भवन में तो स्थानान्तरित हो गया, लेकिन यहां कॉपियां रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। एक के बाद एक सेमेस्टर की परीक्षाएं होने से कॉपियों के ढेर लग रहे हैं।
चूंकि बड़ी संख्या में असंतुष्ट विद्यार्थी कॉपियां देखने के लिए आवेदन करेंगे। ऎसे में गोपनीय विभाग में पर्याप्त कर्मचारी न होने से एक कॉपी को ढूंढना कठिन काम होगा। कॉपियां दिखाने के लिए अलग से विंग बनानी होगी।
इन पर विचार
विश्वविद्यालय निम्न बिन्दुओं पर विचार कर रहा है।
-कितने वर्ष तक की कॉपियां संभाली जाए
-कितने समय में विद्यार्थी को कॉपी दिखाई जाए
-कॉपी दिखाने के बदले कितनी राशि ली जाए
-कॉपियां दिखाने के लिए अलग से विंग तैयार की जाए
-कितने कर्मचारियों व अन्य स्टाफ की जरूरत
-फिलहाल कुछ समय तक राहत के लिए कानूनविद्ों से राय
-साल में दो बार होती है सेमेस्टर परीक्षा
-बीटेक में 19 ब्रांच तक
-16 लाख कॉपियां आती हैं हर छह माह में
-6 कोर्स-बीटेक, एमटेक, एमबीए, एमसीए, आर्किटेक्चर, होटल मैनेजमेंट
-पौने तीन लाख कुल विद्यार्थी
-60 हजार विद्यार्थी हर साल जुड़ते हैं।
'कॉपियां दिखाने की तैयारियां की जा रही है। संसाधन व मानवीयश्रम की कमी से अभी कुछ वक्त लग सकता है, लेकिन न्यायालय के आदेश की प्रति आने व राज्य सरकार से चर्चा के बाद ही विश्वविद्यालय अपने स्तर पर नियम तैयार कर जल्द ही विद्यार्थियों को यह सुविधा उपलब्ध करवाएगा।'
-प्रो. आर.पी. यादव, कुलपति, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय