As reported in Dainik Jagran on 02/09/11

पशुपालन विभाग से मांगते रहो, नहीं मिलेगी सूचना
सिटी रिपोर्टर, गोरखपुर : पशुपालन विभाग के लिए सूचना का अधिकार मजाक बन कर रह गया है। विभाग का पहला प्रयास तो यह रहता है कि मामले को इतना उलझा दो कि सूचना मांगने वाला ही थक कर बैठ जाय। यही वजह है कि एक ही सूचना के लिए अलग-अलग लोगों से अलग-अलग शुल्क मांगा जाता है। यही नहीं एक मामले में तो सूचना देने के लिए 8684 रुपये मांगे गए। इसके बाद भी अगर कोई पक्ष अड़ा रहा तो उसे आधी-अधूरी सूचना देकर पिंड छुड़ा लिया जाता है। मसलन शाहपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता समरेंद्र विक्रम सिंह ने 20 ,22 और 28 अप्रैल को सूचना के अधिकार के तहत चार मामलों में कुछ बिंदुओं पर जन सूचना अधिकारी पशुपालन विभाग गोरखपुर मंडल से कुछ सूचनाएं मांगी। सभी सूचनाओं के बाबत जनसूचना अधिकारी ने 25 मई को जो जवाब दिया उसमें अलग-अलग सूचनाओं के लिए 10 रुपये से लगायत 70 रुपये तक बतौर शुल्क मांगे। श्री सिंह मांग के अनुसार पोस्टल आर्डर लगाकर 24 जून को कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से रिसीव करवाया, पर उनको अभी तक सूचनाओं की प्रतीक्षा है। मालूम हो कि सूचना के अधिकार के तहत महीने भर में सूचना देने का नियम है। तय शुल्क जमा करने के बाद भी श्री सिंह को अभी सूचना की प्रतीक्षा है। इसी तरह का मामला डा.संजीव श्रीवास्तव का भी है। इनकी ओर से सूचना के अधिकार के तहत छह मामलों में बिंदुवार सूचना मांगी गई। फिलहाल एक का भी मुकम्मल जवाब नहीं मिला। उन्होंने 2 मई 2010 में मंडल में विभाग में वित्त वर्ष 2007-11 के बीच कितने भवन व संस्थान बने, दुर्बल वर्ग के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के उत्थान के लिए शुरु की गई बैकयार्ड पोल्ट्री परियोजना, गो सदन और गोशालाओं के सुदृढ़ीकरण एवं स्थापना में खर्च का विवरण, इसी वर्ग के लिए एकीकृत बकरी पालन योजना के बारे में बिंदुवार जानकारी मांगी। सबका जवाब जन सूचनाधिकारी की ओर से एक ही था। मंडल के सभी मुख्य पशुपालन अधिकारी से उक्त के बाबत सूचना मांगी गई है। सूचना मिलते ही आपको उपलब्ध करा दी जाएगी। फिलहाल अभी तक सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों की ओर से एक भी सूचना नहीं मिली।

source:http://in.jagran.yahoo.com/epaper/ar...20109669009912


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