आवास नहीं दिया जवाब तो देते जनाब
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आवास नहीं दिया जवाब तो देते जनाब
As reported in Dainik Jagran on 02/09/11
आवास नहीं दिया जवाब तो देते जनाब
जगनैन सिंह नीटू, गोरखपुर जन सूचना अधिकार अधिनियम से आम आदमी कितना लाभान्वित हो रहा है? उसे सूचना मिल रही अथवा नहीं? यह जानना हो तो विकलांग उमेश से ही पूछिए। कांशीराम योजना में उसे आवास नहीं मिला, इसका कारण जानने के लिए उसने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत अलग-अलग अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर जानकारी मांगी। तकरीबन चार माह गुजर गए, लेकिन उसे सूचना नहीं मिली। सिविल लाइन निवासी चालीस वर्षीय उमेश चन्द्र किरण दोनों पैरों से पोलियोग्रस्त है। स्नातकोत्तर (एमए) की पढ़ाई के बाद विकलांगता के क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण लिया। बहुत कोशिशों के बाद भी सरकारी नौकरी नहीं मिली तो विकलांग उपकरण बनाकर जीविकोपार्जन करने लगा। आवास नहीं था तो कांशीराम आवासीय योजना तारामंडल में आवेदन किया। उम्मीद थी कि अब अपने सिर पर एक छत होगी, लेकिन उसे अपात्र घोषित कर दिया गया। उमेश बताते हैं कि आवास नहीं मिला तो मैंने विगत वर्ष 28 मई को मंडलायुक्त को प्रार्थना पत्र देकर इसकी शिकायत की। इस पर उन्होंने जांच का आदेश दिया। मंडलायुक्त के आदेश के बाद भी कुछ न होने पर 31 मई को एडीएम सदर तथा 3 जून को अपर जिलाधिकारी (राजस्व) से इस बारे आरटीआई के तहत सूचना मांगी। यहां से भी जवाब नहीं आया तो 27 जुलाई को जिलाधिकारी को पत्रक दिया। उसके बाद 16 अगस्त को डूडा विभाग में जन सूचना अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन पत्र भेजकर भी आवास न देने का कारण पूछा। अफसोस कि किसी ने भी उसके प्रार्थनापत्र पर ध्यान नहीं दिया। यही नहीं 2 नवंबर को डाक द्वारा भेजे गए उसके एक प्रार्थना पत्र को तो जन सूचना अधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण ने लेने तक से इंकार कर दिया। स्थानीय स्तर पर जब कुछ नही हुआ तो लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री और विशेष सचिव को ज्ञापन देकर आवास की मांग की और राज्य सूचना आयोग को भी ज्ञापन देकर आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाएं न मिलने की शिकायत दर्ज कराई। उमेश अधिकारियों के इस रवैये से व्यथित हैं। वह सवाल उछालते हैं- बैसाखी लेकर चलने वाले एक विकलांग के प्रति व्यवस्था रहमदिल नहीं तो समान्य आदमी की क्या हालत होगी? दो ग्रापंअ को प्रतिकूल प्रविष्टि बस्ती: गुरुवार को यहां के ग्राम पंचायत अधिकारियों को जिला पंचायत राज अधिकारी समरजीत यादव ने प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। रुधौली व दुबौलिया में अलग-अलग लोगों ने ग्राम पंचायत अधिकारी से सूचना अधिकार के तहत जानकारी चाही थी, इसे गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी समरजीत यादव ने ग्राम पंचायत अधिकारी रुधौली अवधेश कुमार व ग्राम पंचायत अधिकारी दुबौलिया राजेश कुमार पाण्डेय को प्रतिकूल प्रविष्ट दे दी।
Source:http://in.jagran.yahoo.com/epaper/ar...20109869026472




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