दया याचिकाएं सूचना के अधिकार कानून से बाहë
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दया याचिकाएं सूचना के अधिकार कानून से बाहë
As reported in Dainik Jagran on 06/09/11
नई दिल्ली, प्रेट्र : केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने राष्ट्रपति भवन को कहा है कि राष्ट्रपति के समक्ष पेश दया याचिकाएं सूचना के अधिकार (आरटीआइ) कानून के तहत किसी छूट की हकदार नहीं हैं। इसलिए इस पारदर्शिता कानून के तहत जब भी मांग की जाए तो वे सार्वजनिक कीं जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने राजीव गांधी की हत्यारों की दया याचिकाओं का ब्योरा मुहैया कराने का निर्देश दिया। आयोग माइलसामी के की याचिका की सुनवाई कर रहा था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे सांतन, पेरीरिवलन और मुरुगन द्वारा दायर दया याचिकाओं का ब्योरा मांगा था। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने हाल ही में उनकी दया याचिका ठुकरा दी थीं, लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने तीनों की फांसी की सजा के अमल पर रोक लगा दी। जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े होने के कारण इस मामले को प्राथमिकता के तौर पर लेते हुए मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्र ने कहा, भारत के राष्ट्रपति के समक्ष पेश सभी दया याचिकाएं जिन्हें सरकार ने विचार करने के लिए स्वीकार किया हो सार्वजनिक की जानीं चाहिए। ये सूचना के अधिकार कानून के किसी भी प्रावधान के तहत छूट के दायरे में नहीं आतीं। हालांकि, आयोग ने गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रपति को दी गई सलाह को आरटीआइ कानून के दायरे से बाहर रखा। क्योंकि इससे संविधान के अनुच्छेद 74 (2) का उल्लंघन होगा। दया याचिकाओं पर विचार के दौरान संचिका पर की गई टिप्पणी और जिन-जिन अधिकारियों से होकर वह गुजरी उसकी जानकारी भी मिश्र ने उन अधिकारियों का नाम हटाकर सार्वजनिक करने की इजाजत दी।
Source: http://in.jagran.yahoo.com/epaper/ar...20434069020952




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