As reported in Dainik Jagran on 05/04/12

Source:http://in.jagran.yahoo.com/epaper/ar...37303171145848

अभिभावकों का आरटीआई ही सहारा

मेरठ : पब्लिक स्कूल में मनमानी फीस और प्राइवेट प्रकाशन की महंगी किताबों के अलावा कापियों से अभिभावक का बजट बिगड़ गया है। अनावश्यक किताबों के बोझ से बच्चे की कमर झुकने लगी है। नए सत्र से स्कूलों पर शिकंजा कस पाने में शिक्षाधिकारी अक्षम साबित हो रहे हैं। आक्रोशित अभिभावक और सामाजिक संगठन के लोगों ने अब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत आवाज उठानी शुरू कर दी है। शहर के कई पब्लिक स्कूलों में कक्षा छह में कुल 23 किताबें लगाई गई हैं। जो पिछले साल से अधिक है। सूचना का अधिकार टास्कफोर्स के चेयरमैन पुनीत शर्मा ने डीएवी एजुकेशन बोर्ड को पत्र लिखकर कहा है कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय बच्चों का बोझ कम करने के लिए निर्देश दे रहा है। इसके बावजूद स्कूल लगातार किताबें बदल रहे हैं, नए-नए प्रकाशन के किताबें चला रहे हैं। उन्होंने बोर्ड से इसका कारण पूछते हुए नियमानुसार किताबें चलाने और अतिरिक्त किताबें वापस कराने की मांग की है। अपने बेटे को कैंट स्थित एक पब्लिक स्कूल में पढ़ा रहे अवनीश कुमार ने सीबीएसई से सूचना के अधिकार के तहत शहर में चल रहे स्कूलों के फीस बढ़ोतरी और प्राइवेट किताबों के विषय में सवाल पूछे हैं। अवनीश ने आक्रोश जताया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक सहित प्रशासनिक अधिकारी इस लूटखसोट पर आंख मूंदे हुए हैं। कोशिश संस्था के राजेश सेठी ने कहा कि स्कूलों के बेतहाशा फीस वृद्धि और महंगी किताब-कापियों एवं ड्रेस की वजह से बच्चों को पढ़ाना मुश्किल है। ऐसे में अगर जल्द ही इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो अभिभावक सड़क पर उतरने के लिए विवश होंगे।